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चाइल्ड पोर्नोग्राफी सर्च करने वाला पुलिस के निशाने पर, उत्तराखंड में पहला केस दर्ज

आज के भागदौड़ वाली जिंदगी में घर के बड़े अपने बच्चों पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते, उनको अब कम से कम एक बात का सुकून जरूर मिलेगा कि उनके लिए भारत सरकार ने न केवल एक जरूरी और वाजिब कदम उठाया, बल्कि उस पर अमल भी करना शुरू कर दिया है. सरकार के इस कदम से न केवल बच्चे बल्कि बच्चों के विषय पर इंटरनेट पर गलत सामग्री सर्च करने वाले व्यस्क पर भी शिकंजा कसेगा. गलत सामग्री यानी चाइल्ड पोर्नोग्राफी ढूढ़ने वाले 2 लोगों पर पहले ही शिकंजा कस चुका साइबर विभाग अब उत्तराखंड में भी दस्तक दे चुका है. साइबर क्राइम कंट्रोल ने तीसरा मुकदमा इस संदर्भ में देवभूमि उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में पंजीकृत किया है.

भूलकर भी इंटरनेट पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी सर्च न करें और न ही इससे संबंधित सामग्री किसी को भेजें, क्योंकि ऐसा करते ही आपका मोबाइल या कंप्यूटर और लैपटॉप एक खुफिया एजेंसी के रडार पर आ जाएगा. इसे केंद्र सरकार ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर रोक लगाने के लिए इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है. यह एजेंसी देश में कहीं भी ऐसी सामग्री, ब्राउज, डाउनलोड या साझा करने पर संबंधित व्यक्ति को चिन्हित करने में सक्षम है. इसी एजेंसी ने उत्तराखंड में भी एक व्यक्ति पर पोर्नोग्राफी का पहला मुकदमा दर्ज किया है, जो अल्मोड़ा जिले का रहने वाला है. उत्तराखंड स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में चाइल्ड पोर्नोग्राफी का पहला मुकदमा दर्ज किया गया है. यह मुकदमा अल्मोड़ा के एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज किया गया है. साइबर क्राइम के पुलिस क्षेत्राधिकारी अंकुश मिश्रा ने बताया कि नेशनल क्राइम फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लोइटिड चिल्ड्रेन (एनसीएमईसी) देशभर में चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित सामग्री के आदान-प्रदान पर नजर रखती है.

बीते दिनों एजेंसी ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित सामग्री के संबंध में एक रिपोर्ट नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग ब्यूरो (एनसीआरबी) नई दिल्ली को भेजी थी, जिसमें अल्मोड़ा निवासी किशन सिंह का भी जिक्र था. एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उसने चाइल्ड पोर्नोग्राफी का वीडियो इंटरनेट से डाउनलोड कर अपने साथियों को सोशल साइट पर भेजा था. इस पर एनसीआरबी ने देहरादून साइबर पुलिस स्टेशन को मामले की जांच कर आरोपित पर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया. चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित सामग्री डाउनलोड या शेयर करने पर आरोपित के खिलाफ आइटी एक्ट की धारा 67बी के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है. इसमें पांच साल तक का कारावास हो सकता है. इसी तरह अन्य पोर्नोग्राफी से संबंधित सामग्री डाउनलोड या शेयर करने पर आइटी एक्ट की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज होता है. इसमें भी पांच साल की जेल हो सकती है. साथ ही अंकुश मिश्रा ने बताया कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी अपराध की श्रेणी में आता है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के सभी साइबर क्राइम थानों को ऐसा कोई भी मामला सामने आने पर इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है. साथ ही एक एजेंसी को चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित सामग्री का आदान-प्रदान और इस्तेमाल करने वालों को चिन्हित करने की जिम्मेदारी सौंपी है. यह एजेंसी अपनी रिपोर्ट सीधे गृह मंत्रालय को भेजती है, जहां से संबंधित राज्य को कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं, ऐसे में छोटी-सी गलती आपको बड़ी मुश्किल में डाल सकती है.



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