मुंबई : लॉकडाउन की वजह से मुंबई सहित राज्य के विभिन्न जिलों में पिछले 40 दिनों से फंसे मजदूरों को उनके गांव जाने की सशर्त मंजूरी सरकार ने दे दी है.अब मजदूरों को कैसे उनके गांव पहुंचाया जाय इसको लेकर कार्ययोजना तैयार की जा रही है.लॉकडाउन में फंसे लोगों को राहत देने के लिए सरकार ने गुरुवार को ही सभी जिलाधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया था.शनिवार को सरकार की तरफ से हेल्पलाइन जारी किया गया.परिवहन मंत्री अनिल परब ने कहा कि एक हजार के ग्रुप व छोटे छोटे ग्रुप को एक साथ ले जाने के लिए वाहन को मंजूरी दी जाएगी.
लॉकडाउन की वजह से राज्य के विभिन्न में फंसे नागरिक, मजदूर, विद्यार्थी व अन्य लोगों को उनके मूल गांव जाने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाने की जानकारी देते हुए राज्य के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात ने नोडल अधिकारियों का नंबर ट्वीटर पर शेयर किया है. सरकार ने स्थलांतर के संदर्भ में कार्यपद्धति निश्चित की है.जिसके तहत सभी जिलाधिकारी इस प्रक्रिया के प्रमुख (नोडल अधिकारी) नियुक्त किए गए हैं.
राज्य के परिवहन मंत्री अनिल परब ने बताया कि दूसरे राज्यों के लोगों को उनके गांव जाने की अनुमति दी जाएगी.परिवहन मंत्री परब के मुताबिक राज्य में अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए लोग एक एक हजार के ग्रुप में या छोटे ग्रुप में अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर, आधार कार्ड, गांव का पता वाला फार्म भर कर जमा करें.गांव के पते को वहां के प्रशासन मार्फत सत्यापन किया जाएगा.उन्होंने यह भी कहा है कि डॉक्टर से यह भी प्रमाण पत्र लेना होगा कि उन्हें किसी तरह का लक्षण नहीं है.
लॉकडाउन की वजह से राज्य में विभिन्न स्थानों पर 5 लाख 44 हजार परप्रांतीय मजदूर एवं नागरिक फंसे हुए हैं. इसके साथ ही मुंबई, ठाणे, पुणे, नाशिक, नागपुर जैसे महानगरों से नागरिक भी अपने गांव जाना चाहते हैं. राज्य सरकार के आग्रह पर केंद्र सरकार ने परप्रांतीय मजदूरों को को उनके राज्य में जाने की अनुमति दी है. गांव जाने के इच्छुक जिस जिले में हैं उस जिले के नोडल अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं. राज्य के परिवहन मंत्री अनिल परब ने बताया कि दूसरे राज्यों के लोगों को उनके गांव जाने की अनुमति दी जाएगी.