हैडलाइन

पैरोल के लिए अब जांच एजेंसी की सिफारिश जरूरी

मुंबई : आईएएस दंपती की बेटी पल्लवी पुरकायस्थ की हत्या में शामिल जिस सज्जाद मुगल को पैरोल से फरारी केस में पिछले साल गिरफ्तार किया गया था, उसे नाशिक कोर्ट ने एक साल की सजा सुनाई है। मुगल को जम्मू-कश्मीर के बारामुल्ला में उसके गांव सलामाबाद में पकड़ने के लिए मुंबई क्राइम ब्र्रांच के इंस्पेक्टर संजय निकम ने कई महीने तक वहां डेरा डाला था। निकम ने मंगलवार को बताया कि नाशिक की कोर्ट ने उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। पल्लवी पुरकायस्थ केस में मुंबई सेशन कोर्ट उसे आजीवन कारावास की सजा पहले ही सुना चुका है। 

सज्जाद मुगल की पैरोल से फरारी के बाद सरकार ने कई सख्त फैसले लिए। अभी तक किसी वरिष्ठ आईएएस ऑफिसर के नेतृत्व में एक कमिटी सिफारिश करती थी कि किस कनविक्टेड आरोपी को पैरोल पर छोड़ा जाए या न जाए। बाद में जेल अधीक्षक इस सिफारिश पर अमल करता था। मुगल फरारी केस के बाद सरकार ने फैसला किया कि अब उस जांच एजेंसी से भी आरोपी के पैरोल को दिए जाने को लेकर उसकी राय मांगी जाएगी, जिस एजेंसी ने उसे गिरफ्तार किया था। यह भी फैसला किया गया कि मर्डर, रेप, टेरर जैसे केसों में दोषी आरोपी को असाधारण स्थितियों में ही पैरोल दी जाएगी। सज्जाद मुगल जब पैरोल की मियाद खत्म होने के बाद वापस जेल नहीं लौटा, तो संबंधित आईएएस अधिकारी की जांच हुई थी और नाशिक के जेल अधीक्षक को सस्पेंड कर दिया गया था। सज्जाद मुगल की फरारी ने मुंबई पुलिस के होश उड़ा दिए थे। वर्तमान डीजीपी दत्तात्रय पडसलगीकर और तत्कालीन क्राइम ब्रांच चीफ संजय सक्सेना ने इंस्पेक्टर संजय निकम को सज्जाद मुगल को पकड़ने का जिम्मा सौंपा। जब निकम ने यह मुश्किल काम कर दिखाया, तब दोनों आईपीएस अधिकारियों ने उनकी कामयाबी बताने के लिए देर रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। यहीं नहीं, पडसलगीकर इस साल 28 जून को संजय निकम के घर उन्हें उनके जन्म दिन की शुभकामनाए देने पहुंच गए। पडसलगीकर तब मुंबई सीपी की पोस्ट पर थे। इससे पहले किसी भी सीपी ने अपने इंस्पेक्टर को इस तरह प्रोत्साहित नहीं किया था। पल्लवी पुरकायस्थ की साल 2012 में वडाला में उनके घर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड के बाद उनका मंगेतर बुरी तरह डिप्रेशन में चला गया था। बाद में उसकी भी मौत हो गई थी। सज्जाद मुगल को मर्डर के महज 12 घंटे के अंदर इंस्पेक्टर महेश तावडे ने मुंबई सेंट्रल से गिरफ्तार कर लिया था। उसके खिलाफ चार्जशीट दायर हुई, उस पर मुकदमा चला और फिर उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। दोषी करार दिए जाने के बाद उसे नाशिक जेल में रखा गया, पर जेल जाने के कुछ महीनों के अंदर वह 90 दिन के पैरोल पर बाहर आने में कामयाब हो गया था। सज्जाद मुगल को जेल फरारी केस में एक साल की सजा पल्लवी पुरकायस्थ केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है.



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