पारंपरिक गीतों पर कॉपीराइट हो सकता है क्या!

मुंबई : मुंबई उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि वह जल्द ही इस बात पर विचार करेगा कि क्या पारंपरिक गीतों को फिर से गाना कॉपीराइट का उल्लंघन है/ और क्या इस पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है। न्यायमूर्ति बी.पी. धर्माधिकारी और रेवती मोहिते-डेरे की खंडपीठ ने गीतकार प्रमोद सूर्या और दो प्रकाशकों पुखराज सूर्या व हितेन पटेल की ओर से दायर उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें उनके खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन के मामले में दर्ज प्राथमिकी रद्द करने अपील की गई है।

याचिका के अनुसार, प्रमोद ने पारंपरिक मारवाड़ी और गुजराती गीतों का संकलन किया था और उन्हें दो पुस्तकों में प्रकाशित किया। ये विवाह और समारोहों में गाए जाने वाले गीत हैं। दिसंबर २०१४ में आशादेवी सोनगडा ने मालाड पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रमोद और दो प्रकाशकों ने एक गीत की नकल की थी, जिसे वह अपनी एक किताब में पहले ही प्रकाशित कर चुकी हैं।

न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने कहा, ‘ये पारंपरिक गीत हैं, जो पीढ़ियों से शादियों और अन्य समारोहों में गाए और बजाए जाते हैं। कोई इस पर कॉपीराइट का दावा कैसे कर सकता है/ यह तो ऐसा है, जैसे कहा जाए कि हमारे राष्ट्रगान और वंदे मातरम को कहीं भी और कोई भी दोबारा न तो गाए, न प्रकाशित करे।’



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