छठ पर बस वालों की मनमानी: 7-8 हजार किराया देकर 1 स्लीपर में जा रहे 4 लोग

महापर्व छठ की शुरुआत हो चुकी है लेकिन छठ के नाम पर उन लोगों से लूट का बाजार भी फल फूल रहा है जो इस मौके पर अपने घर जाने की कोशिश में हैं. रेल में सीट नहीं है और बस में जाने की मजबूरी है. इसी मजबूरी का फायदा उठा कर बस ऑपरेटर तिगुना किराया वसूल रहे हैं. 'आज तक' की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम ने अपने खुफिया कैमरे में बस ऑपरेटरों की मनमानी को कैद किया है.

दिल्ली से बिहार जाने को तैयार साहिल ट्रैवल्स की एक बस में एक डबल स्लीपर में जहां दो लोगों के सोने की जगह है, वहां 4 लोगों को 20-22 घंटे के सफर के लिए ठूसा गया. बस के क्यूबिकल स्लीपर किसी पिंजरे से कम नहीं.

मां सरस्वती टूर एंड ट्रेवल्स के बस ऑपरेटर राजीव शर्मा ने किराया के बारे में बताया, 'रेट कई तरह के चल रहे हैं. जैसे स्लीपर होता है दो आदमी के लिए. अगर आप पूरा स्लीपर लोगे तो एक बंदे का तीन हजार रुपया पड़ेगा. दो आदमी उसमें आ जाएंगे. अपना शटर डाउन करो और आराम से सोते हुए जाओ.'

रिपोर्टर ने राजीव शर्मा से पूछा, क्या एक स्लीपर के छह हजार देने पड़ेंगे. इस पर राजीव शर्मा ने कहा, 'हां छह हजार रुपए देने होंगे. उसकी दूसरी कंडिशन ये है कि अगर तीन बंदे जाओगे तो उसमें आपके 2200-2200 रुपए लगेंगे. उसमें तीन चले जाएंगे. और अगर आप चार बंदे जाओगे तो उसमें 1800 रुपए लगेंगे.

'आज तक' के रिपोर्टर ने ऑपरेटर से पूछा, 4 कहां जा सकते हैं उसमें. इस पर राजीव शर्मा ने कहा, जा रहे हैं. पूरे चार-चार जा रहे हैं लेकिन मैं तो कंडिशन बता रहा हूं. मैं ये नहीं कह रहा कि आप जाओ. छठ के नाम पर बस ऑपरेटरों की मनमानी का सच ये है कि रेट कार्ड में दोगुने से ज्यादा का इजाफा और वो भी सफर मुश्किलों से भरा. छठ से पहले इन बसों में एक सीट का किराया एक हजार से 1500 तक का था लेकिन अब लूट खुलेआम है.

एक और बस ऑपरेटर गोबिंद कुमार से बात हुई. उसने स्लीपर में 4 आदमी जाने की बात कही और एक आदमी का 1600 रुपए किराया बताया. इतना ही नहीं, नीचे बैठने के 2000 रुपए किराया है. सिर्फ सीट और स्लीपर ही नहीं, बस के हर कोने में, पायदान पर और पैसेज में बैठने की भी कीमत हजारों में वसूली जा रही है. 'आज तक' की स्पेशल इंवेस्टिगेटिव टीम ने पवन ट्रेवल्स की भी पड़ताल की. बस ऑपरेटर अंकित बंसल ने बताया कि कोने में बैठने के भी 1600 रुपए लिए जा रहे हैं.

आनंद विहार से पटना, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और बिहार के दूसरे हिस्से में जाने वाली कई बसों में दिखा कि कैसे सवारियों को ठूंसा जा रहा है. जिन बसों की क्षमता 50 लोगों की है, उनमें 100 लोगों को भरा जा रहा है. कीमत भी 1000 के बदले 2600 तक लिए जा रहे हैं. खुलेआम बस ऑपरेटर अपना रेट कार्ड दिखा रहे हैं. त्रिशक्ति टूर एंड ट्रैवल्स के बस ऑपरेटर माही सैफी ने भी अपनी बसों में स्लीपर के लिए 1800 रुपए से लेकर 3200 रुपए तक किराया बताया. सैफी के मुताबिक, छठ के बाद लोग जाएंगे तो किराया कम है. छठ की वजह से अभी रेट बढ़ा हुआ है.

सरकारी बदइंतजामी की वजह से लोग खुलेआम लूटे जा रहे हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि इस लूट और बदइंतजामी पर सरकार क्यों खामोश है क्योंकि जिनका काम है नियम और कानून को लागू करना वो अपनी आंखें मूंदने की कीमत वसूल रहे हैं.

माही सैफी ने बताया, 'मंथली जाता है, डेली भी जाता है. अलग-अलग होता है हर किसी का. 5 नंबर वाले अलग होते हैं, तीन नंबर वाले अलग होते हैं. ट्रैफिक अलग होती है, पुलिस अलग होती है. बहुत खर्चे हैं क्या-क्या बताया जाए. बस ऑपरेटर अपनी मजबूरी बताकर लूट मचा रहे हैं लेकिन असल मुश्किल तो सवारियों की है. सवारियों ने बताया कि एक स्लीपर में चार से छह लोग जा रहे हैं.



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