मुंबई. शिवसेना-बीजेपी का वाकयुद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जहाँ एक तरफ बीजेपी, शिवसेना पर किसानो के साथ अपने पूर्ण लोन को माफ़ करने के चुनावी वादे से मुकरने का आरोप लगाया है। वहीं अब शिवसेना के आदित्य ठाकरे ने यह आरोप लगाया है कि बीजेपी, शिवसेना से ईर्ष्या करती है क्यूंकि वो अब सत्ता से बहार हो गयी है। उन्होंने ये भी कहा कि सत्ता सुख भोगने में नाकाम बीजेपी अब शिवसेना के हर कार्य में खामियां निकल रहे हैं,क्यूंकि यह उनकी जलन है, हालाँकि उन्हें बरनॉल लगाने की कोई सलाह नहीं दी जाएगी।
वैसे तो यह शिवसेना-बीजेपी का यह छींटा-काशी का दौर शिवसेना-एनसीपी -कांग्रेस की सरकार गठन के बाद और तेज हुआ है। विदित हो कि कुछ दिन पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर तल्ख़ टिपण्णी करते हुए कहा था कि किसानों की कर्जमाफी वायदे पर उद्धव अपनी बात से पलट रहे हैं और इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कह डाला था कि मुख्यमंत्री के इस तरह के यू टर्न को उद्धव ठाकरे टर्न के तौर पर पहचाना जायेगा। ताजा प्रकरण में अब आदित्य ठाकरे ने कहा है कि " हम बीजेपी का दर्द समझते हैं लेकिन हम अपने काम पर पूरा ध्यान दे रहे हैं क्योंकि लोगों ने हम पर भरोसा किया है। हमने अपने वादों को पूरा करना भी शुरू कर दिया है जैसे कि कर्ज माफी, 10 रुपये में खाना या फिर लोगों को घर मुहैया कराना हो। उन्होंने आगे कहा कि "महा विकास अघाड़ी राज्य के कल्याण के लिए सदैव ऐसे ही आगे काम करती रहेगी और हम इस तरह के ट्रोल्स को नजरंदाज करेंगे। उन्हें हमें ट्रोल करने दीजिए क्योंकि वे सत्ता में नहीं हैं। वे ट्रोलिंग में ही व्यस्त हैं । वे हमें उन जगहों से ट्रोल कर रहे हैं जहां उन्होंने इंटरनेट नहीं बंद किया है। यह अच्छा है कि वे अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल ऐसा करने में कर रहे हैं। दरअसल, वे सत्ता से बाहर हैं तो हमसे द्वेष करते हैं।
वहीं यह पूछे जाने पर क्या मुख्यमंत्री उद्धव को लेकर आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट करने वाले वडाला के एक शख्स का शिवसेना द्वारा सिर मुंडना क्या न्यायसंगत है इस पर उन्होंने कहा कि "मैं जानता हूं कि ये ट्रोलर्स न सिर्फ शिवसेना को ट्रोल करते हैं बल्कि महिला और महिला पत्रकारों को भी ट्रोल करते हैं। यह स्वाभाविक है कि जब कोई नाराज होगा तो वह ट्रोलिंग में व्यस्त हो जाएगा। लेकिन मैं लोगों से आग्रह करता हूं कि वे नाराज न हों। दरअसल, सत्ता से बाहर होने की वजह से यह सबकुछ किया जा रहा है। आप को बता दें की इन सबकी शुरुआत महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक ट्वीट के हुई थी। देवेंद्र फडणवीस ने अपने ट्वीट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उनके उस बयान के लिए आलोचना की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है। फडणवीस ने पलटवार करते हुए कहा था की राहुल गांधी हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर की परछाई तक नहीं छू सकते हैं। वहीं अमृता फडणवीस ने भी शिवसेना अध्यक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि कि अपने नाम के पीछे सिर्फ ठाकरे लगा लेने से कोई 'ठाकरे' नहीं हो सकता। इस पर पलटवार करते हुए शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा था कि ठाकरे अपने नाम पर खरा उतर रहे थे लेकिन पेशेवर बैंकर अमृता फडणवीस को यह बात समझ नहीं आई।