मनपा के उप कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संतोष रेवंकर ने बताया कि खसरा के कारण वर्ष २०१५ में विश्वभर में १ लाख ३४ हजार २०० लोगों की मौत

मुंबई सहित पूरे देश में आज भी कई बच्चे खसरा (मीजल्ज) और रूबेला जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो रहे हैं। भारत सरकार ने आगामी साल २०२० तक मीजल्ज-रूबेला के संपूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। ऐसे में मुंबई के भविष्य को स्वस्थ रखने के लिए मनपा के स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। २७ नवंबर से मुंबई के तमाम स्कूलों में फिर चाहे सरकारी हो या निजी सभी स्कूलों के विद्यार्थियों को मीजल्ज-रूबेला (एमआर) से सुरक्षा का सिरिंज लगाया जाएगा। मनपा के उप कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संतोष रेवंकर ने बताया कि खसरा के कारण वर्ष २०१५ में विश्वभर में १ लाख ३४ हजार २०० लोगों की मौत हुई थी, जिसमें से ३६ प्रतिशत यानी ४९ हजार २०० मौतें हिंदुस्थान में हुई थीं। मुंबई के सभी अभिभावकों से हमारा निवेदन है कि वे बेझिझक अपने बच्चों का स्कूल में टीकाकरण होने दें। टीकाकरण की प्रक्रिया बिल्कुल सुरक्षित है। इस मुहिम में मनपा के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), इंडियन एकेडेमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी), यूनिसेफ, लायंस इंटरनेशनल, रोटरी इंटरनेशनल व शहर के बाल रोग विशेषज्ञों द्वारा सहयोग दिया जा रहा है।

क्या है खसरा और रूबेला?

आमतौर पर खसरा को एक संसर्गजन्य रोग माना जाता है लेकिन खसरा श्वसन प्रणाली का एक वायरल संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति जब भी खांसता या छींकता है तो संक्रमण हवा में पैâल जाता है। संक्रमित बलगम और लार के संपर्क में आने के कारण यह एक से दूसरे में पैâलता है। यह खासकर बचपन में होनेवाला एक रोग है। रूबेला, जिसे जर्मन खसरा भी कहा जाता है, एक विषाणुजनित संक्रमण है। यदि कोई गर्भवती महिला इससे संक्रमित हो जाती है तो उसकी कोख में पल रहे बच्चे को कई प्रकार के जन्मजात रोग होने की संभावना अधिक हो जाती है।

क्या है खतरा?

खसरा के कारण बच्चों में दस्त, निमोनिया और उसके दिमाग में संक्रमण हो सकता है, जिसके कारण उसकी मौत भी हो सकती है। रूबेला से ग्रसित होनेवाले शिशु को मोतियाबिंद, माइक्रोसैफली (मस्तिष्क को क्षति और काफी छोटा सिर), गर्भावस्था के दौरान कम विकास, हृदय से जुड़ी विसंगतियां, बहरापन इतना ही नहीं यह शिशु के यकृत, फेफड़ों और अस्थि मज्जा (बोन मैरो) को भी प्रभावित कर सकता है।

३० लाख बच्चों का टीकाकरण

डॉ. संतोष रेवंकर ने बताया कि मुंबई में ९ महीने से लेकर १५ साल तक के ३० लाख बच्चों का मनपा के डॉक्टरों द्वारा टीकाकरण किया जाएगा। पहले ४ से ५ सप्ताह में मुंबई के ४ हजार ५६ स्कूलों के लगभग २० लाख विद्यार्थियों का और उसके बाद ९ हजार ६३२ सामाजिक स्थलों पर लगभग १० लाख बच्चों को एमआर टीका लगाया जाएगा।

मुंबई का ग्राफ

मनपा टीकाकरण विभाग के डॉ. चिपलूनकर ने बताया कि वर्ष २०१७ में मुंबई के २३ क्षेत्रों में खसरा और ३ क्षेत्रों में रूबेला का प्रकोप को देखने को मिला था जबकि वर्तमान वर्ष में ३७ क्षेत्रों में खसरे का और १ क्षेत्र में रूबेला का प्रकोप देखने को मिला है। अभिभावकों से अपील है कि वे अपने बच्चे का टीकाकरण अवश्य करवाएं ताकि उनके बच्चे उक्त बीमारियों का शिकार न हों।



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