भारतीय सीनियर फुटबॉल टीम जनवरी 2019 में यूएई में होने वाले एएफसी एशियन कप की तैयारी के सिलसिले में 17 नवंबर को जॉर्डन के खिलाफ अम्मान में खेले जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय मैत्री मैच का इस्तेमाल अनुभव और रणनीति का अनुभव हासिल करने के लिए करेगी। भारतीय टीम इस मैच के बृहस्पतिवार को रवाना हो रही है।
भारत ने अपनी तैयारी के सिलसिले में अक्टूबर में चीन जैसी मजबूत टीम को उसके घर में गोलरहित बराबरी पर रोका था। भारत की टीम एएफसी एशियन कप 2019में मेजबान यूएई, थाईलैंड और बहरीन के साथ है। भारत यूएई में अपने अभियान का आगाज थाईलैंड कखिलाफ 6 जनवरी को मैच खेल कर करेगा।
भारत के चीफ कोच स्टीफन कोंस्टेनटाइन ने जॉडर्न के खिलाफ इस मैच के लिए टीम के अम्मान रवान होने से पहले कहा, 'हमारे लिए जॉडर्न के खिलाफ यह मैच बहुत लाभदायक साबित होगा। चोट के कारण धुरंधर स्ट्राइकर सुनील छेत्री का जॉर्डन के खिलाफ मैच के लिए उपलब्ध नहीं होना हमारे लिए बड़ा झटका है।'
'छेत्री महान खिलाड़ी है और भारत के लिए उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उनकी जगह कोई भर नहीं सकता है। किसी न किसी को तो जॉर्डन के खिलाफ मैच में छेत्री की जगह लेनी होगी। उनकी गैर मौजूदगी नौजवान खिलाड़ियों के लिए अपना दम दिखाने मौका होगा। हमें यह देखना होगा क्या कोई नौजवान खिलाड़ी इस मौके को भुना सकता है। हमें ऐसा खिलाड़ी तलाशना होगा कि जो कि भविष्य में उनकी जगह ले सके।' उन्होंने कहा, 'हम एएफसी एशियन कप की तैयारियों के क्रम में हमें जॉर्डन जैसी टीमों के खिलाफ खेलने की जरूरत है। जॉडर्न एक अच्छी टीम है और उसकी टीम में कई बढिय़ा खिलाड़ी हैं। चीन और जॉडर्न जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ भी 18 गज के बॉक्स के भीतर गलती गवारा नहीं कर सकते क्योंकि ऐसी गलती कर आप गोल खा सकते हैं। दोनों ही टीमें तकनीकी रूप से मजबूत हैं और दोनों आपके सामने अलग तरह की चुनौती पेश करती हैं। हम अपनी योजना को मैच में अमली जामा पहनाने की कोशिश करेंगे।'
एएफसी एशियन कप की तैयारियों के लिए भारतीय टीम जार्डन के खिलाफ अम्मान में दोस्ताना मुकाबला खेलने जा रही है। टीम की मुख्य धुरी सुनील छेत्री चोटिल हैं और वह इस मुकाबले में नहीं खेल रहे हैं। यह घोषणा पहले ही की जा चुकी है, लेकिन बुधवार को कोच स्टीफन कांस्टेंटाइन जब मीडिया से रूबरू हुए तो चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र छेत्री ही रहे।
कांस्टेंटाइन ने साफ कर दिया कि छेत्री की पोजीशन पर खेलने का यह युवा फुटबालरों के लिए अच्छा मौका है। उनकी उम्र 33 हो चुकी है। एक न एक दिन उन्हें अपने जूतों को खूंटी पर टांगना ही होगा, लेकिन उन्हें अब तक इस खिलाड़ी का विकल्प नहीं मिल रहा है। कांस्टेंटाइन ने माना कि जार्डन जैसी टीम के खिलाफ छेत्री की अनुपस्थिति बहुत बड़ा झटका है।