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मुंबई : नर्सों में कोरोना वायरस का संक्रमण, अस्पताल पर लगे लापरवाही के आरोप

मुंबई : कोरोना महामारी से निपटने के लिए मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट अस्पताल में तैयारियों की भारी कमी है। इसके चलते अस्पताल में 10 नर्सों को संक्रमण का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को संक्रमित नर्सों में से एक के परिवार के सदस्य ने यह आरोप लगाया। युनाइटेड नर्सेज असोसिएशन (UNA)की ओर से भेजे गए एक पत्र में कहा गया है कि Covid-19 के संदिग्ध मामलों को अलग करने में अस्पताल पूरी तरह विफल रहा।

साथ ही पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) देने में लापरवाही और नर्सों को क्वारंटीन और टेस्ट में देरी के कारण ऐसा हुआ। उधर, अस्पताल ने सभी दूसरी इमरजेंसी सेवाओं को सस्पेंड कर दिया है। अस्पताल के सूत्रों ने कहा कि लगभग सभी 265 नर्सों को निगरानी में रखा गया है और उन्हें जरूरी दवाएं दी जा रही हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल में एक मरीज भर्ती हुआ था, जिसमें हार्ट अटैक जैसे लक्षणों थे, हालांकि बाद में उसकी रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी। अस्पताल में वह व्यक्ति चार दिन तक भर्ती रहा।

महाराष्ट्र और केरल (चूंकि कई नर्सें वहां से हैं ) के मुख्यमंत्रियों को चिह्नित पत्र में आरोप लगाया गया है कि संदिग्ध Covid-19 रोगियों को सामान्य आईसीयू में रखा गया था और वहां पर नर्सों ने पीपीई के बिना ही मरीजों की देखभाल की। 28 मार्च को दो नर्सें जिन्होंने रोगी की जांच की थी, उनकी रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी। यूनियन ने दावा किया कि ऐसे हालात में भी अस्पताल ने पॉजिटिव नर्सों के साथ की नर्स से संपर्क करने में तेजी नहीं दिखाई।

महाराष्ट्र यूनियन के अध्यक्ष जिबीन टीसी ने कहा कि 8 से 12 नर्सें एक फ्लैट में रहती हैं। ऐसे में अस्पताल को उन्हें तुरंत होम क्वारंटीन करना चाहिए था लेकिन अस्पताल न केवल उन्हें समय पर जानकारी देने में विफल रहा, बल्कि उनमें से कुछ को ड्यूटी पर रखना जारी रखा। इसके बाद, 8 और नर्सों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। गंभीर आरोप लगाते हुए संघ ने कहा कि एक नर्स जो Covid-19 पॉजीटिव थी, वह एक अप्रैल तक ड्यूटी पर थी। दूसरी नर्सों को तब तक ड्यूटी पर रहना पड़ता था जब तक कि वह बहुत बीमार न पड़ जाए। इसके अलावा इन नर्सों को अन्य सभी नर्सों की तरह ही बस में ले जाया गया।

उधर, अस्पताल के एक सूत्र ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि जब तक मरीज में लक्षण दिखना शुरू नहीं हुआ और उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई, तब तक उनके पास इलाज जारी रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। पहला Covid-19 पॉजीटिव केस 27 मार्च को अस्पताल में एडमिट हुआ था। एक विज्ञप्ति में अस्पताल ने कहा कि यूनियन के सभी आरोप बेबुनियाद हैं। हम अपने अस्पताल के कर्मचारियों के लिए पीपीई और जरूरी दवा प्रदान कर रहे हैं।

संयोग से, अस्पताल में अब तक तीन लोगों की कोरोनावायरस की चपेट में आने से मौत हो गई है। वहां काम करने वाले एक सर्जन की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें (सर्जन) संदेह था कि वह संक्रमित थे और उन्होंने बीएमसी हेल्पलाइन में फोन किया था। अधिकारियों ने कहा कि जसलोक अस्पताल में भी 6 नर्सों सहित 10 कर्मचारी Covid-19 पॉजीटिव हैं।



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