हैडलाइन

सोहराबुद्दीन केस में केंद्रीय जांच एजेंसी पर विशेष सीबीआई अदालत ने की महत्वपूर्ण टिप्पणी

मुंबई, सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति के साथ कथित फर्जी मुठभेड़ की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी पर विशेष सीबीआई अदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत का कहना है कि मुठभेड़ की जांच पहले से सोचे समझे गए एक सिद्धांत के साथ कई राजनीतिक नेताओं को फंसाने के मकसद से की गई थी। विशेष सीबीआई न्यायाधीश एसजे शर्मा ने 21 दिसंबर को मामले में 22 आरोपियों को बरी करते हुए 350 पृष्ठों वाले फैसले में यह टिप्पणी की। अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया था और तीन मौतों पर दुख व्यक्त किया था। फैसले की प्रति शुक्रवार को अनुपलब्ध रही, लेकिन मीडिया को फैसले के अंश मुहैया किए गए। अपने आदेश में न्यायाधीश शर्मा ने कहा कि जांच राजनीति से प्रेरित थी।  

फैसले में कहा गया है, ‘मेरे समक्ष पेश किए गए तमाम सबूतों और गवाहों के बयानों पर करीब से विचार करते हुए मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि सीबीआई जैसी एक शीर्ष जांच एजेंसी के पास एक पूर्व निर्धारित सिद्धांत और पटकथा थी, जिसका मकसद राजनीतिक नेताओं को फंसाना था।’ आदेश में कहा गया है कि सीबीआई ने मामले की अपनी जांच के दौरान सच्चाई को सामने लाने के बजाय कुछ और चीज पर काम किया। 

फैसले के मुताबिक, ‘यह साफ तौर पर जाहिर होता है कि सीबीआई सच्चाई का पता लगाने के बजाय पहले से सोचे समझे गए एक खास और पूर्व निर्धारित सिद्धांत को स्थापित करने के लिए कहीं अधिक व्याकुल थी।’ इसमें कहा गया है कि सीबीआई ने कानून के मुताबिक, जांच करने के बजाय अपने लक्ष्य पर पहुंचने के लिए काम किया। 

'मुकाम के लिए पटकथा पर काम करना था लक्ष्य'

फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस तरह पूरी जांच का लक्ष्य उस मुकाम को हासिल करने के लिए एक पटकथा पर काम करना था। साथ ही, राजनीतिक नेताओं को फंसाने की प्रक्रिया में सीबीआई ने साक्ष्य गढ़े तथा आरोप पत्र में गवाहों के बयान डाले। अदालत ने इस बात का जिक्र किया कि महत्वपूर्ण साक्ष्य के प्रति सीबीआई ने लापरवाही बरती, जो यह स्पष्ट संकेत देता है कि जांच एजेंसी ने आनन-फानन में जांच पूरी की। फैसले में कहा गया है, ‘...इस तरह सीबीआई ने उन पुलिसकर्मियों को फंसाया, जिन्हें किसी साजिश के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।’

अदालत ने इस बात का भी जिक्र किया कि तीन लोगों के मारे जाने का उसे दुख है और इसके लिए सजा नहीं मिल पा रही। साथ ही उसके पास आरोपियों को दोषी नहीं करार देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। फैसले में कहा गया है कि सीबीआई के इस सिद्धांत को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि एक पुलिस टीम ने तीनों लोगों (मृतकों) को अगवा किया था। आदेश में यह भी कहा गया है कि सीबीआई यह साबित करने में भी नाकाम रही कि कथित घटना के वक्त मौके पर आरोपी पुलिसकर्मी मौजूद थे। गौरतलब है कि तीनों लोग (मृतक) हैदराबाद से एक बस में महाराष्ट्र के सांगली लौट रहे थे, जिन्हें 22 - 23 नवंबर 2005 के बीच की रात एक पुलिस टीम ने कथित तौर पर हिरासत में ले लिया और दंपती को एक वाहन में ले जाया गया जबकि प्रजापति को दूसरे वाहन में ले जाया गया।

सीबीआई ने 38 लोगों को बनाया था आरोपी 

सीबीआई के मुताबिक, सोहराबुद्दीन शेख 26 नवंबर 2005 को कथित तौर पर गुजरात और राजस्थान पुलिस की एक संयुक्त टीम ने मार गिराया और तीन दिन बाद कौसर बी मारी गई। प्रजापति 27 दिसंबर 2006 को गुजरात - राजस्थान सीमा पर एक मुठभेड़ में मारा गया। सीबीआई ने इस मामले में 38 लोगों को आरोपी बनाया था। अभियोजन ने 210 गवाहों से पूछताछ की, जिनमें से 92 मुकर गए। न्यायाधीश शर्मा का 21 दिसंबर का फैसला उनके करियर का संभवत: आखिरी फैसला था क्योंकि वह 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। 



Most Popular News of this Week

वाढदिवसाचा स्नेहस्पर्श -...

मुंबईच्या महापौर श्रीमती रितू तावडे यांनी आज (दिनांक १८ एप्रिल २०२६) आपल्या...

महामानव भारतरत्न...

भारतरत्न डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या १३५ व्या जयंतीनिमित्त ठाणे...

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या...

भारतीय राज्यघटनेचे शिल्पकार, महामानव डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या...

महात्मा फुले जयंती पर मुंबई...

 महात्मा जोतीराव फुले की १९९वीं जयंती के शुभ अवसर पर बहुजन, ग्रामीण एवं...

संसदीय राजनीति में रामदास...

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य...

SAMUDRA SAHAS SAILING EXPEDITION FLAGGED OFF FROM MUMBAI AS PART OF REGIMENT OF...

The Samudra Sahas Sailing Expedition, undertaken by the Regiment of Artillery as part of its bicentenary celebrations, was ceremonially flagged off by Lieutenant General N. S. Sarna, PVSM, AVSM, SM,...