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सरकार के दरबार मे प्रलंबित मांगो को लेकर आदिवासीयों का आंदोलन

सरकार के दरबार मे प्रलंबित मांगो को लेकर आदिवासीयों का आंदोलन

पनवेल। आदिवासियों की विभिन्न मांगों पर सरकारी के दरबार में निर्णय नहीं लिये जाने के विरोध में शुक्रवार को रायगढ़ जिले, पालघर, ठाणे, नाशिक सहित पनवेल में अनिश्चितकालीन निर्णायक आंदोलन शुरू किया गया है. श्रमजीवी संगठन-महाराष्ट्र के अध्यक्ष रामभाऊ वारणा के मार्गदर्शन में यह आंदोलन शुरू किया गया है. रायगढ़ महासचिव बालाराम भोईर, रायगढ़ जिला अध्यक्ष हीरामन नाईक, सरपंच कुंदा पवार, आदिवासी संगठन नेता गणपत वारगडा और अन्य ने पनवेल में इस आंदोलन का नेतृत्व किया. इसमें आदिवासियों के कई मौलिक अधिकार के मुद्दे देश की आजादी के 77 साल बाद भी लंबित हैं. ये लोग रोजगार, पेयजल, गांव, घर के नीचे की जमीन, जाति प्रमाण पत्र, राशन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अनुसूचित जनजाति की मान्यता और अन्य पारंपरिक वन अधिकारों आदि सहित हर घर नल से जल पानी योजना के मामले में पीछे हैं. साथ ही उन्हें सही योजनाएं नहीं मिलने के कारण आज यह विरोध प्रदर्शन किया गया. अगर सरकार ने समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया तो ये आदिवासी सदस्य 23 सितंबर को रायगढ़, नाशिक, ठाणे, पालघर जिलों के पंचायत समिति कार्यालयों पर धरना देंगे. साथ ही 25 सितंबर को हजारों आदिवासी भाई अपना अधिकार पाने के लिए पैदल मंत्रालय तक मार्च करेंगे।


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