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हिंदू धर्म दुनिया को मानवता का संदेश देने वाला धर्म है - शरद पोंक्षे

हिंदू धर्म दुनिया को मानवता का संदेश देने वाला धर्म है - शरद पोंक्षे


नवी मुंबई। हिन्दू संस्कृति अपनी अस्मिता को जागृत करने वाली संस्कृति है. हिंदुस्तान पर कई बार आक्रमण हुए, फिर भी हिंदू धर्म कभी ख़त्म नहीं हुआ. हिंदू धर्म एक ऐसा धर्म है जो दुनिया को मानवता का संदेश देता है, ऐसा स्वातंत्र्यवीर सावरकर के अभ्यासक और व्याख्याता शरद पोंक्षे ने वाशी में कहा. शरद पोंक्षे सावरकर विचार मंच नवी मुंबई द्वारा आयोजित व्याख्यान "सावरकर विचार दर्शन" के अवसर पर बोल रहे थे. इस अवसर पर स्व. सावरकर के पोते सात्यकी सावरकर, सावरकर के अभ्यासक रवींद्र नेने, विधायक गणेश नाईक, संस्कार भारती के कोंकण प्रांत के केंद्रीय मंत्री उदय शेवड़े, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ठाणे विभाग के सह-संयोजक कमलेश पटेल, सावरकर विचार मंच के अध्यक्ष संतोष कानडे सहित अन्य उपस्थित थे। 

 
सात्यकी सावरकर ने कहा कि देश में कुछ लोगों की समानांतर व्यवस्था देश को निगल सकती है.  इसके लिए फल, सब्जी समेत सभी चीजें अपने ही भाइयों से खरीदें. देश के लिए धोकादायक व्यबस्था पर नियम अनुसार बुलडोजर चलाना आवश्यक है. सरकार ने हाल ही में गौमाता की कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की है और सभी को इसका समर्थन करने की जरूरत है. शरद पोंक्षे ने कहा कि सावरकर गौर रक्षा के तरफ से थे.  गाय मनुष्य के लिए बहुत उपयोगी है.  गाय का दूध, गोमूत्र समेत हर चीज सेहत के लिए फायदेमंद होती है.  इसके लिए गौ संरक्षण की आवश्यकता है. मुसलमानों के पीछे हिन्दी राष्ट्रवाद ही प्रेरक शक्ति थी. सावरकर जानते थे कि हिंदू राष्ट्रवाद के अलावा हिंदी राष्ट्रवाद कभी भी देश का भला नहीं कर सकता.  सावरकर ने वर्ष 1937 में कहा था कि हिन्द राष्ट्रवाद देश के टुकड़े किये बिना नही रहेंगे. उनकी यह बात 1947 में सत्य साबित हुई. हिंदी राष्ट्रवाद के प्रभाव के कारण देश का विभाजन हुआ. इस्लाम स्वीकार नही करनेवाले छत्रपति संभाजी राजा के शरीर का औरंगजेब ने छलनी कर दीं. छत्रपति ने अंत तक हिंदू धर्म नहीं छोड़ा.  आज के कुछ राजनेता औरंगजेब की कब्र पर जाते हैं और फूल चढ़ाते हैं;  लेकिन जय भवानी जय शिवाजी कहने वाले किसी को भी इसपर गुस्सा नहीं आया. मराठी में राज्यभाषाकोश करने वाले शिवाजी महाराज के बाद सावरकर ने मराठी भाषा को शुद्ध करने का काम किया.  वर्तमान शासकों को मराठी भाषा के संरक्षण के लिए पहल करने की जरूरत है. कार्यक्रम की शुरूआत में संतोष कनाडे ने कहा कि राष्ट्रवाद के अलावा भविष्य में कोई पर्याय नही है.  सावरकर एक वैश्विक नेता थे जिन्होंने इस क्रांतिकारी विचार को प्रस्तुत करके भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की पहचान की और स्वतंत्रता के बाद विश्व राजनीति में भारत की भूमिका प्रस्तावित की।


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