२४ घंटे में पाएं शराब पीने का लाइसेंस
बता दें कि इससे पहले शराब पीने का लाइसेंस देने का अधिकार विभागीय आयुक्त के पास था। अब जिला अधीक्षक लाइसेंस शराब पीने का दे सकते है। गौरतलब हो कि सातवां वेतन लागू करने के अलावा अन्य कारणों से सरकार की तिजोरी की हालत खस्ता हो गई है। इसलिए सरकार को राजस्व जुटाने के लिए शराब की कीमतों को बढ़ाने से लेकर हर तरह का हथकंडा अपना रही है, जिसमें शराब कीमतों को बढ़ाने से लेकर अन्य तरह की उपाय योजना का समावेश है ।
बता दें कि शराब की कीमतों में जब-जब इजाफा हुआ है, तब शराब पीनेवालों का इजाफा हुआ है और सरकार के राजस्व में बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले ९ महीने में १०,५६४ करोड़ रुपए की शराब की बिक्री हुई है। राज्य सरकार ने शराब से वर्ष २०१७ -१८ में १३,४४९,६५ करोड़ की आय की थी। मार्च २०१८ में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने वर्ष २०१८-१९ के लिए १५,३४३,०८ करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था, जिसमें से अप्रैल से दिसंबर २०१८ तक ९०९१,२९ करोड़ की कमाई का लक्ष्य रखा गया था, परंतु उससे अधिक १०,५४६,१६ करोड़ रुपए की कमाई हुई है। भाजपा सरकार के लिए शराब तारन हार साबित होती दिखाई दे रही है।