ओडिशा के कंधमाल जिले में एक सरकारी हॉस्टल में रहने वाली आठ साल की लड़की ने बच्चे को जन्म दिया. यह घटना सामने आने के बाद छह कर्मचारियों के खिलाफ रविवार को कार्रवाई की गई और उन्हें हटा दिया गया. लड़की ने आरोप लगाया कि बच्चे को जन्म देने के बाद उसे नवजात के साथ हॉस्टल से बाहर कर दिया गया. जहां उसे नजदीक के एक जंगल में शरण लेने को मजबूर होना पड़ा.
इस बारे में कंधमाल जिला कल्याण की अधिकारी (डीब्ल्यूओ) चारूलता मलिक ने कहा यह बेहद दुखद घटना है. बच्चे को जन्म देने के बाद लड़की को जंगल में छोड़ दिया गया. इसकी खबर स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी. पुलिस ने रविवार को दोनों को ढूंढा और उन्हें अस्पताल ले गए.
वहीं, जिला कलेक्टर डी ब्रूंडा ने कहा कि इस घटना को हम गंभीरता से ले रहे हैं. संस्थान के दो मैट्रन, दो बावर्ची और अटेंडेंट, एक महिला पर्यवेक्षक और एक सहायक नर्स मिडवाइफ के खिलाफ कार्रवाई की गई है. इसके अलावा स्कूल की प्रिंसिपल राधा रानी दलेई को भी इसी आरोप में निलंबित करने की सिफारिश की है.
बच्ची के प्रेग्नेंट होने से उठा राजनीतिक बवंडर...
ओड़िशा में इस घटना ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है. विपक्ष कांग्रेस और बीजेपी ने ओड़िशा की बीजद सरकार पर जमकर हमला किया. वहीं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति मंत्री रमेश माझी ने जिला कलेक्टर से मामले की जांच करने कहा है. इसके अलावा उन्होंने उन परिस्थितियों पर रिपोर्ट देने भी कहा है जिसमें छात्रा गर्भवती हुई.
तृतीय वर्ष का छात्र गिरफ्तार...
मंत्री रमेश माझी ने भुवनेश्वर में कहा कि, 'सरकार इस घटना को लेकर गंभीर है. पुलिस भी मामले की जांच कर रही है. अभी पुलिस ने तृतीय वर्ष के छात्र को गिरफ्तार किया गया है. उससे पूछताछ की जा रही है.
स्थानीय लोगों ने दिया धरना...
बच्ची की प्रेग्नेंट होने की खबर सामने आने के बाद स्थानीय लोग नाराज है. लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 59 को रोक कर धरना दिया. उनकी मांग है कि अपराधियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और स्कूल की प्रिंसीपल और छात्रावास की वार्डन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.