हैडलाइन

ढाबा में चल रहा था हुक्का बार

वसई : एक ओर पालघर पुलिस जिलेभर में नशा के खिलाफ अभियान चला रही है, वहीं मुंबई-अहमदाबाद हाइवे पर चोरी छुपे कई जगहों पर हुक्का बार चलाए जा रहे हैं। गुरुवार की रात अपर पुलिस अधीक्षक, वसई के अडिशनल एसपी के विशेष दस्ते ने हाइवे के नायगांव स्थित ‘ओये सरदार जी’ ढाबे पर छापेमारी कर हुक्का बार चला रहे दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
दो मैडम, एक टेलर
कागज की किसी पर्ची में सिर्फ मैडम लिखा हो और उसके अलावा कोई सुराग न हो, तो कल्पना की जा सकती है कि किसी केस की गुत्थी को सुलझाना कितना मुश्किल होता है, पर नालासोपारा में एक मैडम के कत्ल का केस पर्ची वाली इसी दूसरी मैडम ने सुलझाया। जिसका पर्ची में नाम लिखा था, वह सीमा थी और जिसका मर्डर हुआ था, उसका नाम कुसुम प्रजापति था।
२१ जनवरी को नालासोपारा पश्चिम में गोकते साल्ट प्लांट के पास एक नाले में एक महिला की लाश मिली थी। किसी ने कंट्रोल रूम को सूचना दी। पुलिस आई, पंचनामा किया, पर वह महिला की शिनाख्त नहीं कर पाई। पुलिस को महिला के एक हाथ पर चांद बना टैटू दिखा और इसी टैटू के आधार पर पास के दो इलाकों हनुमान नगर और टाकीपाडा में महिला की लाश की फोटो दिखाई गई, पर कोई उसे पहचान नहीं पाया। इसी दौरान एसपी गाैरव सिंह और अडिशनल एसपी विजयकांत सागर के निर्देश पर सीनियर इंस्पेक्टर के. डी कोल्हे ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भी भेज दिया। पोस्टमार्टम की प्रकिया के दौरान अस्पताल में डॉक्टरों को महिला की ब्लाउज में एक चिट मिली, जिस पर एक मोबाइल नंबर के आगे सिर्फ एक शब्द लिखा हुआ था--'मैडम' ।
पुलिस ने फिर संबंधित मोबाइल नंबर की कंपनी के जरिए पता लगवाया कि यह नंबर कहां का है और किसके नाम रजिस्टर्ड है/ उसी में कोपरखैरणे की एक महिला सीमा का नाम सामने आया। पुलिस उस सीमा तक पहुंची। उससे पूछताछ की, तो पता चला कि वह वहां गारमेंट्स का एक वर्कशाप चलाती है। उसे जब लाश की फोटो दिखाई गई, तो वह पहचान नहीं पाई।
नालासोपारा टीम निराश होकर वापस चली आई। सीमा के मोबाइल नंबर का फिर डिटेल सीडीआर निकाला गया, ताकि सीमा के नंबर पर आई और उसके नंबर से की गई कॉल्स के बारे में पता किया जा सके कि कहीं वह झूठ तो नहीं बोल रही है! पुलिस को इसमें से भी कोई सुराग नहीं मिला। ऐसे में जांच टीम ने सीमा को इस बार फोटो नहीं, सीधे लाश दिखाने का फैसला किया। फिर भी सीमा नहीं पहचान पाई कि मृतक महिला कौन है/ हां, उस दौरान उसे एकाएक इतना जरूर याद आया कि उसकी पहचान के एक टेलर ने एक बार उससे कहा था कि एक महिला उसे कॉल करेगी। यदि वह काम मांगे, तो उसे दे देना। उस महिला का बकौल सीमा उसके पास कभी कॉल आया नहीं।
चूंकि सीमा ने सीनियर इंस्पेक्टर के. डी कोल्हे, पीएसआई विजय सिरसाटख और किशोर धनु से पूछताछ के दौरान एक टेलर का नाम लिया, तो पुलिस ने उस टेलर से भी पूछताछ करने का फैसला किया। सीमा से टेलर का नंबर मिल ही गया था, इसलिए उसे फोन कर बुलाया गया और फिर उसे भी लाश दिखाई गई। टेलर ने लाश पहचान ली और उसकी पहचान कुसुम प्रजापति के रूप में की। पुलिस ने जब कुसुम के ब्लाउच में मिला 'मैडम' नाम का मोबाइल नंबर दिखाया, तो उसने इसे भी पहचान लिया कि यह नंबर उसी ने चिट पर लिख दिया था। पुलिस ने फिर टेलर की हैडराइटिंग चेक की। चिट की लिखावट वाकई उसी की निकली। मुकदमे के दौरान यह आरोपी के खिलाफ बहुत बड़ा सबूत बनेगी।
टेलर से फिर पुलिस को कुसुम का मोबाइल नंबर मिल गया और मोबाइल नंबर से फिर उसके नालासोपारा वाले घर का अड्रेस भी मिल गया। पुलिस टीम वहां पहुंची, तो इलाके के लोगों ने लाश को पहचान लिया। इलाके के लोगों से ही पुलिस को पता चला कि कुसुम अपने परिवार से अलग रहती थी, पर परिवार कहां है, लोग इसका ठीक-ठीक पता नहीं बता पाए। इसके बाद पुलिस कर्मी महेश पागधरे, रुस्तम राठौड़, हर्षद चव्हाण और प्रवीण भोईर की टीम ने जब कुसुम के मोबाइल के सीडीआर को बारीकी से देखा, तो पता चला कि उसके नंबर पर आखिरी कॉल १८ जनवरी को की गई थी। पुलिस ने फिर इस आखिरी कॉल वाले की पड़ताल की, जो एक नाबालिग का निकला। उसे फौरन पूछताछ के लिए उठाया गया और फिर कई घंटे के सख्त इंट्रोगेशन के बाद उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने पूछताछ में बताया कि उसने जिसका कत्ल किया, वह उसकी मां है और यह अपराध उसने अपने पिता राम मिलन प्रजापति और कजन महेंद्र कुमार प्रजापति के कहने पर किया। उससे मिली टिप के बाद फिर पुलिस ने इन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया।
तीनों से पूछताछ के बाद जो कहानी सामने आई, उसका निष्कर्ष यह था कि कुसुम से अलग होने के बाद राम मिलन प्रजापति ने अपना वह घर बेच दिया था, जिसमें कुसुम रह रही थी। पर कुसुम ने वह घर खाली करने से मना कर दिया था। इसीलिए राम मिलन ने अपने बेटे और महेंद्र का ब्रेनवॉश किया। १८ जनवरी को बेटे ने मां को कॉल किया और बहाने से उसे मीरा रोड स्टेशन बुलाया। इसी दौरान उसने कजन महेंद्र को नालासोपारा स्टेशन पर खडा रहने को कहा। कुछ देर बाद कुसुम अपने नाबालिग बेटे के साथ नालासोपारा पहुंची, तो बेटा उसे गोकते साल्ट प्लांट में उस जगह ले गया, जहां जानवरों का चारा पड़ा हुआ था। वहां कुसुम पर चाकू से वार किया गया और फिर उनकी लाश को चारा के नजदीक के नाले में फेंक दिया गया। तीनों कातिल मानकर चल रहे थे कि जब उनके परिवार की इस महिला की शिनाख्त ही नहीं हो पाएगी, तो वे खुद कभी पकड़े ही नहीं जा सकेंगे। पर लाश में मिली मैडम के नंबर वाली चिट ने उनकी पूरी पोल खोल ही दी और वे सभी अंतत: सलाखों के पीछे पहुंच गए। 


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