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हम नहीं सुधरेंगे!, २६/११ से नहीं सीखा सबक

मुंबई : मुंबई और मुंबई की लोकल ट्रेनें हमेशा से आतंकियों के निशाने पर रही हैं। ९२ में हुए बम धमाके के लिए विस्फोटक समुद्र के रास्ते मुंबई में लाया गया था तथा २६/११ आतंकी हमले को अंजाम देनेवाली कसाब एंड कंपनी समुद्र के रास्ते ही मुंबई में आई थी। उस २६/११ आतंकी हमले को कल १० वर्ष पूरे हो जाएंगे। लेकिन मुंबई सहित पूरी दुनिया को दहलानेवाली इस घटना से सरकार एवं सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों ने कोई सबक सीखा है ऐसा नहीं लगता है। ऐसा मुंबई के समुद्र तटों एवं रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि भविष्य में एक बार फिर यदि २६/११ जैसा कोई आतंकी हमला होता है तो क्या हमारी जांच और सुरक्षा एजेंसियां उससे निपटने में समर्थ होंगी?

बता दें कि २६/११ आतंकी हमले के बाद मुंबई की सुरक्षा के लिए नए सिरे से पुख्ता तैयारी करने का संकल्प लिया गया था। आरटीआई कार्यकर्ता शकील शेख ने तटीय सुरक्षा से जुड़ी तैयारियों के संबंध में आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी लेकिन मुंबई पुलिस विभागीय सहायक आयुक्त (मोटर परिवहन विभाग) जानकारी देने से इंकार कर दिया। शकील शेख ने जब कुछ पत्रकारों के साथ मजगांव, दारूखाना, लकडा बंदर स्थित मुंबई पुलिस के नौका विभाग के गैरेजों में जांच की तो तटीय सुरक्षा के लिए दी गई १६ बोटें मरम्मत के अभाव में कबाड़ बनती नजर आईं। गौरतलब हो कि केंद्र सरकार की ओर से तटीय सुरक्षा के लिए २३ बोट मुंबई पुलिस को मिली थी। जबकि मुंबई पुलिस के पास ९ बोट पहले से ही मौजूद थी। जबकि अब उन ३२ (२३+९) बोटों में से १६ बोटें मरम्मत के इंतजार में दारुखाना स्थित गैरेज में कबाड़ बन रही हैं। इतना ही नहीं सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के लिए कुल ४६४ कर्मचारियों की टीम गठित करने का निर्णय लिया गया था। जिसमें ५८ पीएसएई, ५८ वरिष्ठ ड्राइवर, खलासी २४६ सहित १०२ अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की योजना थी। लेकिन आज सिर्फ १७२ कर्मचारी ही इस टीम में तैनात हैं, जिसमें २० पीएसआई, १२ वरिष्ठ ड्राइवर, १२७ खलासी तथा १३ अन्य कर्मचारी शामिल हैं। जबकि २२९ जगह अभी भी खाली है। इसी तरह मुंबई के उपनगरीय रेलवे स्टेशनों एवं रेलवे टर्मिनसों पर अधिक प्रवेश द्वार के कारण संदिग्धों पर नजर रखने में पुलिस एवं रेलवे सुरक्षा बल को काफी असुविधा होती है। यहां सीसीटीवी वैâमरे तो लगे हैं लेकिन लगातार निगरानी रखने के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारी मौजूद नहीं हैं। जबकि संपर्क के लिए उन्हें दिए गए शस्त्र भी पुराने हो चुके हैं। एक दूसरे से संपर्क के लिए दिए गए वाकी टॉकी तथा संदिग्धों की जांच के लिए दिए गए ज्यादातर मेटल डिटेक्टर एवं अन्य उपकरण भंगार हो चुके हैं, ऐसा आरपीएफ के सूत्रों का कहना है।



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