पनवेल के धोखादायक इमारतों में रहता है 274 परिवार
पनवेल। मुंबई और उपनगरों में धोखादायक इमारतों के गिरने से निर्दोष लोगों की मौत की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं. हालांकि ये घटनाएं हर साल बढ़ती रहती है, लेकिन इन घटनाओं पर लगाम लगाने में सभी प्राधिकरण विफल होती दिखाई दे रही है. पनवेल मनपा क्षेत्र में भी सैकड़ो इमारतों को धोखादायक घोषित किया गया है. लेकिन खास बात यह है कि मनपा द्वारा घोषित धोखादायक इमारतों में आज भी सैकड़ो परिवार रह रहे है. जिसके कारण अगर भविष्य में अगर कोई दुर्घटना होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? ऐसा सवाल बना हुआ है।
मनपा ने इन इमारतों को धोखादायक और बेहद धोखादायक ऐसे दो भागों में बांटा है. हालांकि इनमे से सर्वाधिक सबसे धोखादायक इमारतें पनवेल और कलंबोली शहर में हैं. पनवेल की इन 62 बेहद धोखादायक इमारतों में 274 परिवार रहते हैं. जो की पनवेल शहर में जर्जर और धोखादायक इमारतें कई सालों से खड़ी हैं. ये इमारतें पनवेल नगर परिषद काल से ही खड़ी हैं. इस बीच जब गणेश देशमुख पनवेल मनपा के आयुक्त थे, तब धोखादायक इमारत के पुनर्विकास ने गति पकड़ी और मनपा ने धोकादायक इमारतो पर बैनर लगा कर किसी को भी धोखादायक इमारत के परिसर में प्रवेश करने से मनाई की थी. खारघर में 3, कलंबोली में 180, कामोठे में 21 और पनवेल शहर में 70 परिवार बेहद धोखादायक इमारतों में रह रहे हैं. मनपा ने इन इमारतों की सूची की प्रसिद्ध की है और कुछ इमारतों के पानी एंव बिजली कनेक्शन भी बंद करने शुरू कर दिया हैं।
नेताओ का दबाव कितना उचित?
मनपा द्वारा धोखादायक घोषित इमारतों में बिजली और पानी की आपूर्ति बंद करने के बाद, कुछ निवासी राजनीतिक नेताओं के दबाव का उपयोग करके बिजली और पानी बहाल कर रहे हैं. अगर ऐसी इमारत में कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना होती है तो जिम्मेदार होगा? ऐसे में सवाल है कि राजनीतिक हस्तक्षेप कितना उचित है।
धोखादायक इमारतों को गिराएगा कौन ?
धोखादायक घोषित की गई कई इमारतें खाली भी हो गई हैं. लेकिन इन इमारतों के गिरने का इंतजार करना है या मनपा खुद ही इन इमारतों को गिराएगी ऐसा सवाल नागरिको मे बना है।