गाजियाबाद : गाजियाबाद पुलिस की स्वाट टीम ने शनिवार को आरडीसी में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। इस कॉल सेंटर में बैठे जालसाज विभिन्न राज्यों के बेरोजगारों के साथ नौकरी के नाम पर ठगी करते थे। पुलिस टीम ने कॉल सेंटर में काम कर रहे आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें गिरोह का मास्टरमाइंड भी शामिल है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कलानिधि नैथानी ने बताया कि इस गिरोह के लोग नौकरी डॉट कॉम जैसी विभिन्न ऑनलाइन सेवा प्रदाता कंपनियों से बेरोजगार युवाओं के प्रोफाइल खरीद लेती थीं। इसके बाद प्रोफाइल में दर्ज मोबाइल नंबरों पर बल्क में आकर्षक नौकरी के मैसेज भेज जाते थे। शिकार के जाल में फंसते ही जालसाज इंटरव्यू कराने के नाम पर और अन्य मदों में अपने गूगल पे, फोन पे व पेटीएम अकाउंट में पैसे जमा कराते थे। उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ साल से इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे जालसाजों ने आरडीसी में विधिवत कॉल सेंटर खोल रखा था। गुप्त सूचना के अधार पर पुलिस ने शनिवार को इस कॉल सेंटर में दबिश देकर आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो आरोपी फरार होने में सफल हो गए। अब स्वाट टीम इन आरोपियों की तलाश कर रही है।
एसएसपी ने बताया कि आरोपियों के पास से पांच लैपटॉप, 28 मोबाइल फोन, 71 सिमकार्ड, 55 हजार 200 रुपये नकद, विभिन्न कंपनियों के ऑफर लेटर, लोन अप्रूवल लेटर, नियुक्ति पत्र, विभिन्न बैंकों के एटीएम, डेबिट और क्रेडिट कार्ड के अलावा अन्य सामान बरामद हुआ है। सभी आरोपियों के खिलाफ जालसाजी के अलावा साइबर एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। जल्द ही इनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई होगी। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि विभिन्न साइटों पर लोग नौकरी के लिए आवेदन करते हैं। ऐसे में वह प्रोफाइल खरीद कर आवेदकों को नौकरी दिलाने के बल्क संदेश भेजते थे। फिर उन्हें विश्वास में लेकर उनके नाम से फर्जी नियुक्ति पत्र/ इंटरव्यू लेटर/कॉल लेटर आदि भेज देते थे। फिर व्हाट्सऐप कॉल के माध्यम से उनसे संपर्क कर गूगल पे/फोन पे/पेटीएम एकाउंट में रुपये डलवाते थे। पैसे आने के बाद आरोपी उस नंबर को कुछ समय के लिए बंद कर देते थे।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया है कि वह रोज सौ से अधिक कॉल करते थे। इनमें से औसतन 10 से 12 शिकार रोज ही फंस जाते थे। वह महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश इत्यादि के नम्बरों पर कॉल करते थे। इससे पीड़ित उनके खिलाफ शिकायत भी नहीं कर पाते थे। एसएसपी ने बताया कि जालसाजों ने अपना कॉलसेंटर बिल्कुल सिस्टमेटिक ढंग से बनाया था। इसमें तीन हिस्से बनाए गए थे। एक हिस्से में कॉल करने वाले सदस्य बैठते थे। दूसरे हिस्से में बैंक ऑपरेशन का काम होता था। तीसरे हिस्से में फर्जी दस्तावेज बनाए जाते थे। उन्होंने बताया कि इस गिरोह को सिमकार्ड और बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वालों को तीस फीसदी कमीशन दिया जाता था।
एसएसपी ने बताया कि पकड़े गए जालसाज ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे। इनमें गिरोह का मास्टरमाइंड व नेहरू नगर निवासी स्वतंत्र शर्मा (49) इंटर पास है और पहले मेडिकल स्टोर का काम करता था। वेद विहार मोदीनगर का रहने वाला तुषार उर्फ आकाश तोमर (40) बीए पास है और पहले कपड़े की दुकान करता था। इसी प्रकार कृष्णा नगर निवासी विक्रम सिंह यादव (45) ने बीए की पढ़ाई की है। ललित शर्मा निवासी विवेकानंद नगर इंटर पास है और वेब डिजाइनिंग का काम जानता है। मंगूपुरा मुरादाबाद का रहने वाला प्रीतम सिंह बीए पास है। विशाल कुमार निवासी विवेकानंदनगर ने एमकॉम की पढ़ाई की है। संजय भारद्वाज निवासी गोविन्दपुरम हाईस्कूल पास है और बिजली निगम में संविदाकर्मी है। वहीं हिमांशु शर्मा निवासी एनआईटी फरीदाबाद का रहने वाला है और 11वीं तक पढाई की है।