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हाथ से निकला प्लॉट, शिवसेना का बचाव

मुंबई: पोइसर के प्लॉट पर गार्डन, स्कूल के आरक्षण की जमीन को खरीदने के बजाय रेकॉर्ड करने के प्रस्ताव का शिवसेना ने अजब तरीके से बचाव किया है। स्थायी समिति अध्यक्ष यशवंत जाधव ने कहा कि आरक्षण का लाभ जनता को न मिलकर केवल बिल्डर को मिल रहा था। इसी वजह से हमने यह फैसला किया। 

जाघव ने कहा कि प्रशासन को संबंधित आरक्षण विकसित करने की समय-सीमा बतानी होगी, तभी हम इसे पास करेंगे। हालांकि, दूसरे भूखंड पर स्लम होने के बावजूद प्रस्ताव पास किए जाने के सवाल पर जाधव सही से जवाब नहीं दे पाए। विपक्ष ने इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा किया। लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी जाधव ने उन्हें अंत में ही बोलने को कहा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर हंगामा जारी रहेगा। जाधव के व्यवहार से खिन्न विपक्ष इस मुद्दे को सभागृह में उठाने की तैयारी कर रहा है। शिवसेना की समय-सीमा की ‘पवित्र’ भूमिका में कई पेंच हैं।

बीएमसी के पास आरक्षण वाली जमीन को खरीदने के प्रस्ताव लाए जाते हैं। इनमें आरक्षण विकसित करने की कोई समय-सीमा नहीं होती है। हां, तय समय में जमीन न खरीदने पर आरक्षण जरूर रद्द हो जाता है। जाधव की मांग के अनुसार, नियमों में बदलाव करने होंगे। नियमों के मुताबिक, बीएमसी से पास होने के बाद प्रस्ताव कलेक्टर के पास से अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए जाता है। फिर उस जमीन पर बसे पात्र झोपड़ाधारकों का पुनर्वसन कर वहां सुविधाओं का विकास किया जाता है। कई बार तो बीएमसी के पास पर्यायी घर उस इलाके में नहीं होते हैं, जिसके चलते स्थानीय लोग जाने का विरोध करते हैं। इन शर्तों के बीच आरक्षण विकसित करने की समय-सीमा में कई चुनौतियां हैं।

जाधव ने आश्चर्यजनक रूप से जमीन मालिक को पुनर्वसन करने की जिम्मेदारी देने की बात कही। हालांकि, बीएमसी नियमों के मुताबिक इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होती है।  खंड को विकसित करने की समय-सीमा के साथ ही प्रस्ताव प्रशासन को लाना चाहिए। तभी जनता को इसका लाभ मिल सकेगा। हम अब इस तरह के प्रस्ताव ही पास करेंगे।  स्थायी समिति में इतने महत्वपूर्ण मसले पर हमें बोलने नहीं दिया गया। हम इस मुद्दे को जोरशोर से सभागृह में उठाएंगे। जनता के हित में भाजपा को साथ देना चाहिए।

पोईसर के गार्डन प्लॉट पर पार्टी की अनोखी भूमिका आरक्षण की जमीन

कांदिवली और गोरेगांव में स्कूल, गार्डन, मैदान के आरक्षित करीब 17,000 वर्ग मीटर आरक्षित जमीन को खरीदने का प्रस्ताव रेकॉर्ड कर दिया गया। इसके अलावा, 18,000 वर्ग मीटर के दो अन्य प्रस्ताव रोड की जमीन के थे। इनकी बाजार कीमत करीब 400 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इन प्रस्तावों के रेकॉर्ड पर जाने से आरक्षण हाथ से जाने का खतरा बन गया है।



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