तिरुअनंतपुरम: केरल के सबरीमला मंदिर में सदियों पुरानी परंपरा तोड़ते हुए ४२ और ४४ साल की दो महिलाओं के दर्शन करने से नाराज होकर लोगों ने गुरुवार को सड़कों पर जमकर उत्पात मचाया। हिंदू संगठनों के आह्वान पर हड़ताल के दौरान बड़े पैमाने पर पथराव, हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। कई जगह सीपीएम दफ्तरों पर भी हमले हुए। पुलिस ने २६६ लोगों को गिरफ्तार किया है और ३३४ लोगों को हिरासत में लिया गया है। चाकूबाजी की एक घटना में भाजपा के तीन कार्यकर्ता घायल हो गए। बुधवार को पथराव के दौरान घायल शख्स ने दम तोड़ दिया है। पूरे राज्य में भारी संख्या में लोग बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर फंस गए।
बता दें कि सबरीमला में रजस्वला महिलाओं के दर्शन पर पाबंदी की पुरानी परंपरा खत्म करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने १० से ५० साल की उम्र वाली महिलाओं को भी दर्शन करने की इजाजत दे दी थी। कई बार नाकाम कोशिश करने के बाद बुधवार को दो महिलाएं दर्शन करने में कामयाब हो गईं। इसी के विरोध में कई हिंदूवादी समूहों के संगठन सबरीमला कर्म समिति की ओर से १२ घंटे की हड़ताल का आह्वान किया गया था। भाजपा ने बंद का समर्थन किया, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने काला दिवस ??मनाया।
केरल के सीएम पिनराई विजयन ने राज्य में हो रहे प्रदर्शनों पर बीजेपी, आरएसएस को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि हिंसा से सख्ती से निपटा जाएगा। सीएम ने कहा कि सबरीमला जाने वाली कनकदुर्गा और बिंदू ने मंदिर जाने के लिए सुरक्षा मांगी थी, उसी के बाद उन्हें सुरक्षा दी गई। वे ऊपर से नहीं उतरी थीं। वे सामान्य भक्तों की तरह मंदिर गई थीं। बाकी श्रद्धालुओं ने उनका विरोध नहीं किया। महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ आंदोलन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ हड़ताल करने जैसा है। मुख्य पुजारी के विरोध पर सीएम ने कहा कि अगर उन्हें सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्वीकार नहीं था तो पद छोड़ देना चाहिए था।