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श्मशान में आवारा कुत्तों का बसेरा

श्मशान में आवारा कुत्तों का बसेरा

पनवेल। वर्तमान में कलंबोली-रोडपाली के श्मशान में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ गयी है. इन आवारा कुत्तों के कारण शवों के क्षत-विक्षत होने की संभावना होने से समय रहते ध्यान देकर इन आवारा कुत्तों पर नियंत्रण करने की मांग पास के नागरिकों द्वारा की जा रही है. गौरतलब है कि पहले भी में आवारा कुत्तों ने श्मशान में जलती चिताओं को नोचने की घटना घट चुकी हैं. ऐसी घटनाओं से शवों के क्षत-विक्षत होने की आशंका रहती है, इसलिए प्रशासन को इन घटनाओं को रोकने के लिए प्रयास करने की जरूरत है।

पनवेल मनपा के कलंबोली-रोडपाली इलाके में सिडको द्वारा श्मशान घाट उपलब्ध कराया गया है. लाखों की आबादी वाले इस इलाके में प्रतिदिन दो से तीन शव दाह संस्कार के लिए लाए जाते हैं. इसके लिए सिडको की ओर से कर्मचारियों की भी नियुक्ति की गई है. चिता पर लकड़ियां बिछाने से लेकर शव को पूरी तरह जलाने तक की जिम्मेदारी कर्मियों की होती है. लेकिन यहां आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से कर्मचारियों की सिरदर्दी बढ़ गयी है. चश्मदीदों के मुताबिक श्मशान घाट में आवारा कुत्ते जलती हुई चिता की ओर बढ़ रहे होते हैं जिसके कारण कर्मियों को अपना काम बहुत सावधानी से पूरा करना पड़ता है।


मनपा का दावा फेल

मनपा अधिकारियों का कहना है कि कुत्तों को पकड़ने के लिए बार-बार वंहा गाड़ी भेजी जा रही है.  हालांकि ये कुत्ते नहीं मिलने से पकड़ में नही आ रहे.  आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए मनपा प्रशासन हर साल लाखों रुपये खर्च करता है. प्रशासन का दावा है कि इस खर्च से कुत्तों पर नियंत्रण की जा रही हैं. हालांकि हाल ही में जन्मे पिल्लों को श्मशान में टहलते हुए देखने से प्रशासन का यह दावा झूठा साबित हो रहा है।


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