हिंदी देशभर में लोगों के बीच संवाद का माध्यम बन रही है। स्थानीय भाषाओं का सम्मान करते हुए हिंदी को संपर्क की भाषा के रूप में बढ़ावा देना चाहिए। यह बात दैनिक भास्कर के स्थानीय संपादक विजय सिंह कौशिक ने कही। वे सांताक्रुज पूर्व स्थित सरस्वती शिक्षण संस्थान में आयोजित हिंदी दिवस और गांधी जयंती समारोह में बोल रहे थे। मुंबई प्रांतीय राष्ट्रभाषा प्रचार सभा और सरस्वती शिक्षण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह की अध्यक्षता डॉ. विपिन चंद्र मेहता ने की। उन्होंने कहा कि विज्ञान पढ़ें या दुनिया में कहीं भी जाएं, लेकिन साहित्य और अपनी भाषा को नहीं छोड़ना चाहिए।
विशेष अतिथि ध्यान योगी श्री ओम दास जी महाराज ने कहा, जाति-पाँति पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई। उन्होंने हिंदी को समाज को जोड़ने वाली भाषा बताते हुए इसके प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।
समारोह में विजय सिंह कौशिक ने अपने केरल दौरे का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वहां कई होटल और व्यवसाय करने वाले लोग हिंदी में बातचीत करते हैं। यहां तक कि कर्नाटक से आए पर्यटक भी केरल के होटल और रेस्टोरेंट संचालकों से हिंदी में बात करते हैं। ऐसे में हिंदी अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के लोगों के बीच संवाद का माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि देश की सभी भाषाओं का सम्मान होना चाहिए और लोगों को स्थानीय भाषा भी सीखनी चाहिए।
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय सेवा सम्मान डॉ. दयानंद तिवारी, अखिल भारतीय पत्रकारिता सम्मान विजय सिंह कौशिक और वरिष्ठ पत्रकार सुधाकर कश्यप को प्रदान किया गया। कांति लाल जोशी स्मृति सम्मान राजकुमार यादव तथा अखिल भारतीय हिंदी सेवी सम्मान शिक्षिका वैशाली पाटिल को दिया गया।
डॉ. दयानंद तिवारी ने संस्था के इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि इसकी शुरुआत महात्मा गांधी के मार्गदर्शन में 1936 में जमनालाल बजाज की अध्यक्षता में हुई थी। संस्था के मंत्री संचालक बृजेश तिवारी ने संस्था के कार्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम की शुरुआत कवि रवि यादव की सरस्वती वंदना से हुई।
इस अवसर पर महाराष्ट्र भाजपा प्रवक्ता अजय पाठक, कवि मुकेश गौतम, गायक सुरेश शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार शैलेन्द्र श्रीवास्तव, राजकुमार सिंह, विनय दुबे सहित समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोग उपस्थित रहे।