निर्भया की 7वीं बरसी पर DIF की चर्चा में जानिए कितना बदला हमारा समाज

दिल्ली : राजधानी दिल्ली में 16 दिसम्बर 2012 को हुए 'निर्भया रेप कांड' के इतने वर्षों बाद भी देश में महिलाओं पर आत्याचार के मामलों में कोई कमी देखने को नहीं मिल रही है। देश को झकझोरने वाले 'निर्भया कांड' के बाद उम्मीद की जा रही थी कि समाज में महिलाओं को लेकर संवेदनाशीलता में कुछ तो प्रगति हुई होगी। लेकिन उन्नाव और हैदराबाद में हुई वारदातें इस उम्मीद को तोड़ देती हैं। देश में आज भी महिलाओं के प्रति हिंसा और बालात्कार की घटनाएं आम बात बनी हुई हैं। 'निर्भया' की सातवीं पुण्यतिथि पर 'डायलॉग इनिशिएटिव फाउंडेशन' ने 'राष्ट्रीय ​महिला आयोग' के साथ मिलकर दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में 'महिला सुरक्षा और समाज' विषय पर एक संवाद का आयोजन किया।

कार्यक्रम में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई और उपस्थित वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कैसे हम पुरुष सत्तातमक समाज में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता को और बढ़ावा दें। क्या हमारे कानून में कोई खामी है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही? इन सभी प्रश्नों के जवाब खोजने के लिए ही 'डायलॉग इनिशिएटिव फाउंडेशन' ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा, इंडियन विमेंस प्रेस कॉर्प की जनरल सेक्रेटरी विनीता पांडे, इम्पॉवर विमेन ऑफ इंडिया टूअर की फाउंडर रुक्जैंड्रा एना मारिया, सेफ कैम्पस की फाउंडर एंड डायरेक्टर दीप्ति शंकर, एनडीटीवी की एक्जीक्यूटिव एडिटर निधि कुलपति, मनोचिकित्सक डॉ. अणुनीत सभरवाल और एडवोकेट मुक्ता शर्मा अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और अपने विचार रखे।

'डायलॉग इनिशिएटिव फाउंडेशन' के फाउंडर डा. राकेश योगी ने परिचर्चा के विषय की जानकारी देते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने महिलाओं के प्रति हो रहे अपराध के पीछे समाज के लोगों में आ रहे मानवता की कमी को प्रमुख कारण बताया। एनडब्ल्यूसी की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने देश के शिक्षण संस्थाओं में बच्चों को मोरल और सेक्स एजुकेशन देने की बात कही। उन्होंने समाज में वर्षों से महिलाओं के प्रति चली आ रही असमानता को खत्म करने की बात कही। रेखा शर्मा ने अपने बचपन के दिनों को भी याद किया जब वह देहरादून की सड़कों पर बिना किसी खौफ के रात में साइकिल चलाया करती थीं। एनडीटीवी की एग्जीक्यूटिव एडिटर निधि कुलपति ने कहा कि महिलाओं को हर दिन ही बुरी नजरों से गुजरना पड़ता, बलात्कार की घटनाओं को मीडिया में इतनी प्रमुखता नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ अपराध करने वालों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की आवश्यकता है, सुरक्षा के इंतजामों को पुख्ता करने के लिए और अधिक पैसा खर्च करने की जरूरत है। वरिष्ठ पत्रकार अमित आर्या ने कहा कि महिलाओं को निडर रहना होगा और अपने खिलाफ हो रहे अपराधों के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि समाज को यह समझना होगा कि महिलाओं की ना का मतलब ना होता है। कार्यक्रम का अंत आंचल शर्मा द्वारा निर्देशित एक नाटक के मंचन के साथ हुआ, जिसका विषय एसिड अटैक था।



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