हैडलाइन

'7777' से नेताजी का लगाव, गाड़ियों पर यूज कर रहे थे फर्जी नंबर प्लेट

मुंबई, एक चार डिजिट के नंबर से जुड़ा अंधविश्वास राजनेता पप्पू कालानी के बेटे ओमी कालानी पर भारी पड़ सकता है। एक सोशल ऐक्टिविस्ट ने ओमी के खिलाफ आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है कि वह अपनी लग्जरी एसयूवी गाड़ियों पर दूसरे वाहनों का '7777' पर खत्म होने वाला नंबर इस्तेमाल कर रहे हैं। ओमी को 7777 नंबर से अपने लगाव के लिए पहले भी चर्चा में रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक उनकी सभी गाड़ियों की नंबर प्लेट में लास्ट में यही चार डिजिट्स हैं। इतना ही नहीं, कूड़ा उठाने के लिए हाल ही में उल्हासनगर मेयर और उनकी पत्नी पंचम कालानी ने जो सिविल हेल्पलाइन जारी की है, वह भी इससे नहीं बच सकी। यह हेल्पलाइन 9858337777 है, जिसके आखिर में 7777 आता है। 

ठाणे पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट 

बीते 3 नवंबर को ठाणे के एक ऐक्टिविस्ट बीनू वर्गीज ने कल्याण-शिल्फाता रोड पर टिंटेड शीशों वाली एक रेंज रोवर को जाते देखा, जिसका नंबर MH04 GE7777 था। उन्होंने आरटीओ की वाहन ऐप पर यह नंबर डालकर देखा तो पता चला कि यह अशर डिवेलपर्स के डायरेक्टर अजय प्रताप अशर की मर्सिडीज बेंज कार का नंबर है। 

बीनू ने फौरन ठाणे पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट किया। उन्होंने बताया, 'मुझे किसी और गाड़ी के नंबर पर दूसरा वाहन देखकर शक हुआ।' रेंज रोवर को पुलिस ने मुंब्रा में रोका, जिसमें ओमी खुद मौजूद थे। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, 'उन्होंने पुलिस से जाने देने को कहा और वादा किया कि वह रजिस्ट्रेशन पेपर बाद में भिजवा देंगे।' हालांकि उन्होंने कोई डॉक्यूमेंट्स नहीं भेजे। 

पुलिस ने नहीं सुनी शिकायत 

वर्गीज ने और पड़ताल करने का मन बनाया और उन्हें पता चला कि इस राजनीतिक परिवार की एक और रेंज रोवर गाड़ी की नंबर प्लेट पर किसी टोयोटा इनोवा क्रिस्टा गाड़ी का नंबर (MH05 DH7777) पड़ा है। यह गाड़ी ओमी की मां ज्योति कालानी की बताई जा रही है जो उल्हासनगर से एनसीपी विधायक हैं। उनके पति पप्पू भी यहीं से चार बार विधायक रह चुके हैं। बीनू वर्गीज यह मामला लेकर संबंधित अधिकारियों के पास पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा, 'इन गाड़ियों से कोई ऐक्सिडेंट होने पर असली मालिक मुसीबत में फंस सकता है।' उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी शिकायत तो सुन ली, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की है। पुलिस का कहना है कि एफआईआर में देरी की वजह यह है कि वे सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं, यह मामला मोटर वीइकल ऐक्ट से जुड़े सेक्शन में दर्ज होगा या आईपीसी के तहत। 

ओमी ने दी यह दलील 

डीसीपी ट्रैफिक अमित काले ने कहा कि हमने कागज जांच के लिए भेजे हैं, साथ ही आरटीओ को भी इस बारे में सूचित किया है। वहीं, ओमी का कहना है कि 7777 नंबर पर उनके विश्वास के चलते उनके साथ यह 'शरारत' की गई है। उन्होंने कहा, 'मैं गाड़ियां खरीदता-बेचता रहता हूं और मैंने एक एजेंट की मदद से ये गाड़ियां ली हैं, शायद उसने मुझसे गाड़ियां खरीदवाने के लिए इन नंबरों का लालच दिया और इस्तेमाल किया।' 



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