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MeToo के आरोप के बाद VP के सुसाइड पर बढ़ा आक्रोश, जेनपैक्ट के खिलाफ कैंडल मार्च

यौन शोषण का आरोप लगने के बाद सस्पेंड किए गए जेनपैक्ट के वाइस प्रेसिडेंट स्वरूप राज के सुसाइड करने के मामले में लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. सोमवार को कई लोगों ने नोएडा सेक्टर-135 स्थित कंपनी जेनपैक्ट के खिलाफ कैंडल मार्च निकाला. बड़ी संख्या में लोग जेनपैक्ट के गेट पर इकट्ठा हुए, उन्होंने कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की. मार्च में शामिल स्वरूप राज के माता-पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे के मरने में जेनपैक्ट दोषी है. कंपनी ने बिना आरोपों की जांच किए ही स्वरूप पर एक्शन ले लिया. स्वरूप पर जो आरोप लगाए गए थे वो आधारहीन थे. कंपनी ने उनके बेटे का कत्ल किया है. इस आत्महत्या के लिए कंपनी पूरी तरह जिम्मेदार है.

जेनपैक्ट के वाइस प्रेसिडेंट स्वरूप राज पर मी टु का आरोप लगा था. इसके बाद उन्होंने नोएडा सेक्टर-135 स्थित अपने घर में 18 दिसंबर पंखे से फांसी लगाकर जान दे दी थी. उनकी कंपनी की दो महिला कर्मचारियों ने स्वरूप पर यौन शोषण का आरोप लगाया था. कंपनी ने उसी दिन उनसे बात किए बिना उन्हें सस्पेंड कर दिया था. इसके बाद स्वरूप राज ने आत्महत्या कर ली थी.

सुसाइड नोट में स्वरूप ने खुद को निर्दोष बताया था. उन्होंने यह भी लिखा था कि जांच के बाद सच्चाई बाहर आ जाएगी. नोएडा पुलिस जेनपैक्ट और उसके अधिकारियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर लिया है. पुलिस ने जो FIR दर्ज की है उसमें वो 2 लड़कियां भी शामिल हैं, जिन्होंने स्वरूप राज पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था, पुलिस के मुताबिक इन दोनों से भी पूछताछ की जाएगी. इसके साथ ही जेनपैक्ट कंपनी, HR के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट सचिन कुमार, छेड़छाड़ के आरोप की जांच करने के लिए बनी कमेटी के अधिकारी, सस्पेंशन के ज़िम्मेदार कंपनी के अधिकारी, स्वरूप के सुपरवाइजर सुजोय घोष, सीईओ एनवी टाइगर, चीफ ऑफ HR पीयूष मेहता, ग्लोबल ऑपरेटिंग ऑफिसर डैरेन सौमुर और सभी एक्जीक्यूटिंग डाइरेक्टर के खिलाफ केस दर्ज किया गया है.

नोएडा पुलिस ने इन सभी के खिलाफ धारा 306 यानी आत्महत्या के उकसाने का मामला दर्ज किया है, पुलिस अब इन सभी से जल्द ही पूछताछ करेगी. वहीं इस केस में कई अनसुलझे सवाल हैं. स्वरूप किस तरह अपनी पत्नी कीर्ति को इस आरोप के बारे में नहीं बता पाए जबकि वह भी उसी कंपनी में काम कर रही थीं. कंपनी ने आखिर उन्हें फौरन क्यों सस्पेंड कर दिया, क्या कंपनी ने स्वरूप को दोषी मान लिया था. आखिर जांच कमेटी ने उन्हें एक बार भी सफाई का मौका क्यों नहीं दिया. सुसाइड नोट से लग रहा है कि आरोप बेबुनियाद हैं लेकिन इन सभी सवालों की बारीकी से जांच जरूरी है.

स्वरूप के परिवार का कहना है कि अगर महिलाओं का यौन शोषण हुआ तो वो पुलिस के पास क्यों नहीं गईं, रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज कराई गई. पुलिस ने अब क्यों मामला दर्ज किया है. एसएसपी अजयपाल शर्मा का कहना है कि जितने भी आरोपी हैं उन सबसे पूछताछ की जाएगी. इसके बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि सुसाइड के पीछे का असली कारण क्या है?



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