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अंजली दमानिया के पीछे कौनसी शक्ति है यह समझने के लिए उनकी नार्को टेस्ट कराएं और कॉल डिटेल्स चेक करें - उमेश पाटील

अंजली दमानिया के पीछे कौनसी शक्ति है यह समझने के लिए उनकी नार्को टेस्ट कराएं और कॉल डिटेल्स चेक करें - उमेश पाटील

मुंबई। अंजली दमानिया ने सुपारी लेकर हमारे नेता अजितदादा पवार के खिलाफ मुहिम छेड़ी है। उनके पीछे कौनसी शक्ति है, यह समझने के लिए उनकी नार्को टेस्ट कराई जाए और कॉल डिटेल्स चेक की जाए, ऐसी मांग राष्ट्रवादी कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटील ने सरकार से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की।

पुणे के कल्याणीनगर में हुई दुर्घटना के मामले में अंजली दमानिया ने अजितदादा पवार की नार्को टेस्ट की मांग की थी। इस पर बोलते हुए उमेश पाटील ने अंजली दमानिया पर कड़ा प्रहार किया।

पुणे की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, इसमें कोई संदेह नहीं है। इस घटना ने सबका मन व्यथित कर दिया है। इस मामले में उचित कार्रवाई होते हुए हम देख रहे हैं। इस घटना में दोषियों की मदद करने वाले दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। दो डॉक्टरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पूरे मामले में बेटे, पिता और दादा को भी गिरफ्तार किया गया है। लेकिन इस मामले में जानबूझकर हमारे नेताओं को सुपारी लेकर निशाना बनाने का काम कुछ लोग कर रहे हैं, ऐसी कड़ी आलोचना उमेश पाटील ने की।

राज्य में सूखे की स्थिति को देखते हुए अजितदादा पवार मंत्रालय में बैठक कर रहे थे, जबकि कुछ लोग जम्मू-कश्मीर में छुट्टियां मनाने गए हैं। मतदान खत्म होते ही अगले दिन अजितदादा पवार मंत्रालय में आकर काम कर रहे थे, जबकि अंजली दमानिया अजितदादा पर काम का दिखावा करने का आरोप लगा रही हैं। उन्होंने कहा कि अंजली दमानिया समाजसेवा का दिखावा कर रही हैं, जबकि अजितदादा पवार पिछले 35 वर्षों से जनता के काम के लिए सुबह 6 बजे उठते हैं, इसलिए लाखों लोग उन्हें वोट देते हैं। क्या आपको किसी ने चुना है? क्या आप कभी ग्राम पंचायत में भी चुनाव जीते हैं? एक चुनाव लड़कर पता करें कि कितने लोग आपके साथ हैं, ऐसे कई सवाल उमेश पाटील ने अंजली दमानिया से किए।

अजितदादा पवार पर आरोप लगाने वाली अंजली दमानिया के पास क्या सबूत हैं? क्या पुणे के कमिश्नर से पालक मंत्री के रूप में उन्होंने पूछताछ नहीं की? या अजितदादा को अंजली दमानिया से पूछकर कॉल करना था? मिडिया-सैवी होने का मतलब यह नहीं है कि काम करने वाले व्यक्ति को मिडिया की जरूरत होती है, ऐसा उमेश पाटील ने स्पष्ट किया।

उमेश पाटील ने कहा कि अंजली दमानिया राज्य में घटी कई घटनाओं के प्रति वास्तव में संवेदनशील हैं या सिर्फ पुणे की घटना पर सुपारी ली है, यह स्पष्ट करें।

मनुस्मृति की प्रतिगामी विचारधारा हमें स्वीकार नहीं है। लेकिन जिस तरह की नौटंकी जितेंद्र आव्हाड कर रहे हैं, उनके विरोध का क्या कारण है, यह स्पष्ट करें। मनुस्मृति हो, भगवद्गीता हो, या समर्थ रामदास के विचार हों, जितेंद्र आव्हाड का किससे विरोध है, ऐसा सीधा हमला उमेश पाटील ने किया।

शालेय शिक्षा में मूल्यशिक्षण का महत्व है। पुणे की घटना से मूल्यशिक्षण की गंभीरता का पता चलता है। अगर भगवद्गीता का समावेश शालेय शिक्षा में होता है तो जितेंद्र आव्हाड को क्या आपत्ति है? मन के श्लोक से बच्चों पर संस्कार होते हैं, तो उस पर जितेंद्र आव्हाड को क्या आपत्ति है? चातुर्वर्ण्य व्यवस्था को मनुस्मृति में स्वीकार किया गया है, उसका विरोध होना समझा जा सकता है और हमारा भी विरोध है। जब तक हमारी सरकार है, इसे किसी भी पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया जाएगा, ऐसा उमेश पाटील ने स्पष्ट किया।

सरकार ने सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। कोई भी निर्णय सीधे नहीं होता। इस बारे में जितेंद्र आव्हाड ने सरकार को पत्र लिखा है या सिर्फ स्टंटबाजी के लिए मनुस्मृति जलाने का काम कर रहे हैं? मनुस्मृति जलाने से आप प्रगतिशील नहीं बनेंगे। छत्रपति शिवाजी महाराज, फुले, शाहू और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को दिल से आत्मसात किया गया है, उसका प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं है, ऐसा उमेश पाटील ने कहा।


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