नई दिल्ली : कोरोना लॉकडाउन के दौरान भारत में 95% चाइल्ड पोर्न की मांग बढ़ी,पेरेंट्स रहें सावधान

नई दिल्ली : भारत आज कोरोना के खिलाफ एक निर्णायक युध्ह लड़ रहा है। इसमें देश के लोगों से यह अपेक्षा कि जा रही है कि वे अपने घरों  पर रहकर आइसोलेशन का पालन करें । इस तरह घरों पर रहने से लोगों ने अपने मनोरंजन के विवध साधनों से अपना मन बहला रहे हैं। जिसमे इन्टरनेट का वर्चस्व है और साथ ही अन्य साधन जैसे फिल्में जिसके लिए तो netflix आदी  अन्य साधन उपलब्ध हैं । लेकिन कहानी का एक दूसरा हिस्सा भी है। 

दरअसल  इंडिया चाइल्ड  प्रोटेक्शन फण्ड (ICPF)ने दावा किया है कि कोरोना प्रकोप के दौरान चाइल्ड पोर्नोग्राफी मटीरियल (जिसे ‘चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल’ भी कहा जाता है) की मांग में खतरनाक वृद्धि देखी गई है। आईसीपीएफ के अनुसार, ऑनलाइन डेटा मॉनिटरिंग वेबसाइट में अब ‘चाइल्ड पोर्न’, ‘सेक्सी चाइल्ड’ और ‘टीन सेक्स वीडियो’ जैसी खोजों की मांग में वृद्धि दर्ज कि गई है। दुनिया की सबसे बड़ी पोर्नोग्राफी वेबसाइट पोर्नहब के डेटा से तो यह भी चौकानें वाली बात पता चलती  है कि 24 मार्च से 26 मार्च 2020 के बीच अकेले भारत से पोर्न ट्रैफ़िक में 95 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जो कि एक भयंकर और रूह कंपा देने वाला तथ्य है। 

अपनी रिपोर्ट में ICPF ने दावा किया है कि भारत  कि राजधानी दिल्ली उन शहरों में से है जहाँ बाल पोर्नोग्राफिक सामग्री की  सबसे ज्यादा मांग  है, जिससे COVID-19 से प्रेरित लॉक डाउन  के दौरान बच्चों कि सुरक्षा को गंभीर जोखिम है। ICPFने ‘चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल इन इंडिया’ शीर्षक से एक रिपोर्ट भी  जारी की है, जो भारत के 100 शहरों जैसे नई दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता, भुवनेश्वर और इंदौर में चाइल्ड पोर्नोग्राफी की मांग पर शोध पर तैयार कि गई है । इसके अनुसार जहाँ दिसंबर 2019 के दौरान सार्वजनिक वेब पर 100 शहरों में बाल पोर्नोग्राफी की कुल मांग औसतन 5 मिलियन प्रति माह थी, वह अब बढ़ गई है।

रिपोर्ट से यह भी  ता चलता है कि हिंसक सामग्री की मांग में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो बच्चों को के प्रति खतरनाक है। इसमें  नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई जैसे मेट्रो शहरों के अलावा कई टीयर IIशहर भी शामिल हैं। ,जो शहर कोरोनोवायरस के मामलों में तेज वृद्धि देख रहे हैं, वही शहर चाइल्ड पोर्नोग्राफी के लिए भी  हॉटस्पॉट के रूप में तेजी से उभर रहे हैं ऐसा ICPFने दावा किया है। ICPF ने यह  चेतावनी भी  दी है कि बच्चों के लिए इंटरनेट अब  बेहद असुरक्षित बन चुका  है। इसमें कड़ी कार्रवाई  कि जरुरत है अन्यथा इसके परिणामस्वरूप बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में भारी वृद्धि हो सकती है।

उक्त्त रिपोर्ट में यूरोपोल, यूनाइटेड नेशंस, ECPAT की रिपोर्ट का हवाला भी  दिया गया है जिसमें कहा गया है कि बच्चे अब ऑनलाइन ग्रूमिंग और यौन जनित अपराधों  का शिकार हो रहे हैं, साथ ही चाइल्डलाइन इंडिया हेल्पलाइन की हालिया खबर का हवाला देते हुए कहा गया है कि 92,000 से ज्यादा एसओएस कॉल अब यौन हिंसा से सुरक्षा की मांग करते देखे जा रहे हैं। वह भी कोरोना आइसोलेशन के समय। ICPF यह भी कहता है कि  लॉकडाउन की अवधि के दौरान भारत के बच्चों द्वारा यौन अपराध का सामना अधिक किया जा रहा है जो कि एक भयावह सच है । बाल यौन शोषण सामग्री की मांग के बढने से  संकेत मिलता है कि यह आपराधियों बच्चों के प्रति अधिक आसक्त हैं।

ICPF भारत सरकार  से यह दरख्वास्त कर रहा है कि भारत सरकार को चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर तुरंत रोक लगानी चाहिए और बाल यौन शोषण सामग्री के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए वैश्विक बातचीत शुरू करनी चाहिए। आपको बता दें कि इंडिया चाइल्ड  प्रोटेक्शन फण्ड(ICPF)दक्षिण एशिया के सबसे बड़े बाल संरक्षण संगठनों में से एक है, जो बाल तस्करी और बाल बलात्कार को समाप्त करने के लिए काम करता है। 



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